May 2013
तेरी आँखों में हमने क्या देखा

May 02 2013

मोतियाबिंद की समस्या बुजुर्गों को होती है ये तो हम सब जानते हैं , आश्चर्य तो तब हुआ जब प्रदीप भाई ने अपने दस साल के बेटे की दोनों आँखों में इस तकलीफ की बात बतायी। प्रदीप गंजडुण्डवारा में रहते हैं। हमारा उनका औपचारिक परिचय अभी तक नहीं है.
एक दिन यूँ ही उनका फ़ोन आया और उन्होंने इस समस्या से लडाई में हमारी मदद माँगी। वैसे वो सफ़दरजंग हॉस्पिटल में अभय को दिखा चुके थे किन्तु उससे संतुष्ट नहीं थे.
ऐसे में हमने महावीर इंटरनेशनल में उषा कपूर जी को समस्या से अवगत कराया . उन्होंने मरीज़ को फ़ौरन नबी करीम सेंटर पर भेजने के लिए कहा . वहां पर हुयी जांचों से भी स्पष्ट हुआ कि ऑपरेशन कराना होगा।
उषा कपूर और हमने महावीर इंटरनेशनल के डायरेक्टर अशोक जैन साहब से सफ़दरजंग हॉस्पिटल में इस ऑपरेशन के लिए मदद माँगी which was more than forthcoming. He got us an appointment with Dr. V.S.Gupta HOD, the very next day and it was decided that the operation would be conducted without any loss of time. Mr. Jain was so kind and considerate that he even arranged for the lenses.
Abhay has got both his eyes operated and is hale and hearty.
Thanks Mr. Ashok Jain, Mahavir International, Ms. Usha Kapoor, Dr. V.S. Gupta and Safdarjung Hospital for making it possible.
Team Anubhuti


श्रद्धांजली

March 11 2013

इस यात्रा में बहुत साथी हैं और इसी वजह से ये सुहानी और बर्दाश्त करने लायक है. इसमें एक आदमी की कमी बहुत शिद्दत से अखरती है. वो कोई बड़ा आदमी नहीं था. लेकिन अगर आज वो हमारे साथ होता तो बात ही कुछ और होती। बहुत से साथी उसे जानते हैं बहुत से नहीं भी . मनोज भाई आपको यकीनन याद होगा और मुझे विश्वास है आप सहमत होंगे कि अगर आज भूरे होता तो मज़ा आ जाता।
भूरे उसका असली नाम नहीं था। हमें असली नाम पूछने में और उसे बताने में पसीने आ गए थे. मनोज भाई की बहुत जिद के बाद उसने बताया था कि उसका असली नाम शीतल प्रसाद है , साथ में यह भी जोड़ा कि अब सब भूरे ही कहते हैं . और फिर वह हम सबके लिये भी भूरे ही हो गया .
भूरे गाड़ी चलाता था। अपने फ़न में तो वो माहिर था ही इंसान भी बहतरीन था . हमेशा उसे मुस्कुराते ही देखा . कभी कोई शिकायत नहीं। खाना न मिल सका तो भी कोई परवाह नहीं। बच्चोँ की तरह निष्छल। कई बार तो भेड़िया आया भेड़िया आया वाली कहानी मिलू के बहाने उसको ही सुननी होती थी।
दिल्ली की हर वो जगह जहाँ हमें जाना होता था उसे पता थी। दिल्ली को उसने और हमने मिल के ही जाना था। अगर आज बहुत से रास्ते पता हैं तो ये भूरे की वजह से ही है .
एक दिन भूरे को चेस्ट पेन की शिकायत हुई तो डॉक्टर को दिखाया गया। तब हम लोग दिल्ली में नहीं थे. बाद में जब हम दिल्ली आये और चेक अप कराया तो पता लगा कि Heart की problem है. Angioplasty करानी होगी। सबके संयुक्त और छोटू ( करुणेन्द्र ) के विशेष प्रयास से AIIMS में ये भी हो गया। और लगा कि सब ठीक हो गया।
लेकिन कुछ साल बाद ही one morning he did not get up. It was 6th of January. And since than we have been struggling to learn to live with out him.
अनुभूति का पटियाली सफ़र उसके जाने के बाद ही शुरू हुआ। अगर आज भूरे होता तो जिस तरह का काम हम लोग कर रहे हैं उसे देख कर बहुत खुश होता।
हर यात्रा में तुम्हारी याद साथ रहती है और भले ही तुम हमें छोड़ कर चले गए हमारे संघर्ष का अभिन्न हिस्सा तुम हमेशा रहोगे. दोस्त भूरे तुम हमेशा याद किये जाओगे.
अनुभूति टीम


दिल्ली-म्याऊ रोडवेज बस सेवा आरंभ

March 10, 2013

पटियाली: तटवर्ती ग्रामीणों की परेशानी को दृष्टिगत रखते हुये परिवहन विभाग ने दिल्ली-म्याऊ बस सेवा का शुभारंभ किया है। परिवहन विभाग की यह बस दिल्ली से रात्रि नौ बजे प्रस्थान करेगी जो कासगंज, गंजडुण्डवारा, पटियाली होकर ग्राम म्याऊ सुबह 6 बजे पहुंचेगी। एक घंटे विश्राम  के बाद सात बजे म्याऊ से पुन: रवाना होकर दिल्ली पांच बजे शाम को पहुंचेगी।

विदित हो कि ग्राम म्याऊ के ग्रामीणों की परेशानियों को दृष्टिगत रखते हुये ग्रामीणों ने अनुभूति सेवा समिति अध्यक्षा किरण यादव के समक्ष बात रखी जिसको अमली जामा पहनाते हुये समिति की पहल पर शनिवार की सुबह ग्राम म्याऊ में परिवहन विभाग की बस पहुंची तो ग्रामीणों की खुशी का ठिकाना न रहा।

ग्रामीणों ने परिवहन विभाग की बस का प्रथम बार आगमन पर जोरदार स्वागत कर मिष्ठान वितरण किया । इस दौरान ग्राम प्रधान शोएब खान, पूर्व प्रधान बाबू भाई, अरसद खां, शाहजेब हुसैन, मलिक, खालिद काजी, रामनिवास, अब्दुल्ला रहमान, जावेद, साहिद अली, मलिक एम साजिद कलम, दीपक यादव सहित अनेक लोग उपस्थित थे।


श्रद्धांजली

March 11 2013

इस यात्रा में बहुत साथी हैं और इसी वजह से ये सुहानी और बर्दाश्त करने लायक है. इसमें एक आदमी की कमी बहुत शिद्दत से अखरती है. वो कोई बड़ा आदमी नहीं था. लेकिन अगर आज वो हमारे साथ होता तो बात ही कुछ और होती। बहुत से साथी उसे जानते हैं बहुत से नहीं भी . मनोज भाई आपको यकीनन याद होगा और मुझे विश्वास है आप सहमत होंगे कि अगर आज भूरे होता तो मज़ा आ जाता।
भूरे उसका असली नाम नहीं था। हमें असली नाम पूछने में और उसे बताने में पसीने आ गए थे. मनोज भाई की बहुत जिद के बाद उसने बताया था कि उसका असली नाम शीतल प्रसाद है , साथ में यह भी जोड़ा कि अब सब भूरे ही कहते हैं . और फिर वह हम सबके लिये भी भूरे ही हो गया .
भूरे गाड़ी चलाता था। अपने फ़न में तो वो माहिर था ही इंसान भी बहतरीन था . हमेशा उसे मुस्कुराते ही देखा . कभी कोई शिकायत नहीं। खाना न मिल सका तो भी कोई परवाह नहीं। बच्चोँ की तरह निष्छल। कई बार तो भेड़िया आया भेड़िया आया वाली कहानी मिलू के बहाने उसको ही सुननी होती थी।
दिल्ली की हर वो जगह जहाँ हमें जाना होता था उसे पता थी। दिल्ली को उसने और हमने मिल के ही जाना था। अगर आज बहुत से रास्ते पता हैं तो ये भूरे की वजह से ही है .
एक दिन भूरे को चेस्ट पेन की शिकायत हुई तो डॉक्टर को दिखाया गया। तब हम लोग दिल्ली में नहीं थे. बाद में जब हम दिल्ली आये और चेक अप कराया तो पता लगा कि Heart की problem है. Angioplasty करानी होगी। सबके संयुक्त और छोटू ( करुणेन्द्र ) के विशेष प्रयास से AIIMS में ये भी हो गया। और लगा कि सब ठीक हो गया।
लेकिन कुछ साल बाद ही one morning he did not get up. It was 6th of January. And since than we have been struggling to learn to live with out him.
अनुभूति का पटियाली सफ़र उसके जाने के बाद ही शुरू हुआ। अगर आज भूरे होता तो जिस तरह का काम हम लोग कर रहे हैं उसे देख कर बहुत खुश होता।
हर यात्रा में तुम्हारी याद साथ रहती है और भले ही तुम हमें छोड़ कर चले गए हमारे संघर्ष का अभिन्न हिस्सा तुम हमेशा रहोगे. दोस्त भूरे तुम हमेशा याद किये जाओगे.
अनुभूति टीम


The Computer Centre

February 18, 2013

Last year when we met in the first workshop for the volunteers Tabrez Bhai had mentioned that we should go for a Centre of NCPUL (National Council for the Promotion of Urdu Language) at Patiyali as it would not only help the promotion of Urdu language but also bring Computer education to this area. Some of us at the end of the workshop were wondering as to what is the 'Take Home' from the workshop? This Republic Day when the Centre opened at Patiyali, there were smiles all around. In fact it was euphoria.
Crossing all hurdles we were able to get the Centre inaugurated on 26th January by Rajyavardhan Singh Rathore. The credit for the entire show goes to Tabrez Bhai, Mohit Gupta & Malik M. Sajid. Timelines were difficult, there were too many loose ends and yet we did it. And we did it in a manner that every body was thrilled. Rajyavardhan got a very warm welcome and he was dignity and grace personified. Thanx Rajyavardhan for the pains you took to travel that far and being a part of the proceedings. Do forgive us if there were any slip ups.
Thanx Tabrez Bhai for every thing you did to make the event happen. Thanx Mohit for having been the anchor of the show in more ways than one. Thanks Sachin for providing the car. Thanx Anuj Saxena for organising the Centre. Thanx Rajeev Rai for being there and making the speech you made. Thanks Alok, Arun, Kamal, Arif for being there. Thanks Dharmendra, Sudhir, Yogendra & Amarjeet.
Thanks Shahid for the flight you took from Hyderabad to conduct the programme. Thanks Neena, you came and gave that much needed company to Kiran Yadav. Prabhat Bhai your presence and enthusiasm lifted us. Thanx a lot. Thanks Gyanendra for contributing despite being unable to attend.
What do we say to Sajid. Words fail and Thanx is too small a word to convey what you have been like. Thanx Sanjay & Manish Bhai. Thanks Babloo, Bhaskar, Poornesh, Dhananjay, Rakesh Bhai, Saajan for joining.
There was a lot of tension, freighed nerves, but everything fell in place. The synchronization was perfect and finish was elegant. Thank you one and all. Let us hope we better this soon.
Team Anubhuti


श्रद्धांजली

March 11 2013